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Sunday, January 22, 2023

अच्छा चलता हूँ !

 माना कि तेरे साथ चल नहीं पाऊँगा , 

माना कि तेरे साथ हँस नहीं पाऊँगा | 

तेरे आँसू, तेरे गम बाँट नहीं पाऊँगा ,

पर तेरा हि हिस्सा बनकर, तुझमे हि बस्ता जाऊँगा | 

जाना तो होगा मुझे इस जहान को छोड़ कर ,

खुदा के घर से आया है बुलावा शायद कुछ सोचकर | 

तेरे ख्वाबो, हमारे सपनो, अपने वादो को तोड़ कर ,

पर रहूँगा तेरे दिल में हमेशा एक हसींन वक्त बनकर | 

इन खूबसूरत आँखों का दरिया हम पर मत बहाना ,

ये बेशुमार मोहब्बत की दौलत हम पर ना लुटाना ,

थाम लेना किसी का हाथ तु ,

और उसमे हि अपना जहान बसा लेना | 

तेरे होंठो कि मुस्कुराहट देख, मैं खिल जाऊँगा ,

तेरी आँखों में खुशियों कि चमक देख, मैं तृप्त हो जाऊँगा | 

तू जिएगी, तो मैं भी जी जाऊँगा ,

मैं तुझ में हि हूँ, तुझमे हि बसता जाऊँगा | 

याद कभी आए मेरी तो चले आना हमारे मकबरे पर ,

मैं तो तेरे गले कि तावीज बन कर, तुझे सलामत करता जाऊँगा | 

तेरी साँसे मेरी रूह की धड़कनें है ,

जिस दिन तू ये जहान छोड़ कर जाएगी ,

                                                        मैं तुझे आसमान में हि मिल जाऊँगा | 


                                                                                               - प्रेरणा राठी 



Wednesday, March 10, 2021

बदल गया हूँ मैं

हाँ, बदल गया हूँ मैं ,

खुद के ही नए हिस्से से मिला हूँ मैं | 

नहीं जानता था कल तक मैं इसे ,

पर वक्त और हालात ने मिला दिया मुझे इससे | 

मानू या ना मानू, ये मेरा ही हिस्सा हैं ,

मेरी कहानी का ये भी एक किस्सा हैं | 

खुद को ही जानने कि कोशिश कर रहा हूँ ,

नए आज को समझने कि कोशिश कर रहा हूँ | 

प्यार है अगर मुझसे, तो तु भी इसको जान ले ,

मोहब्बत है अगर मुझसे, तो तु भी इसको मान ले | 

तुने मुझे बदलते हुए देखा हैं ,

और शायद इसी का तुझे गिला है | 

पर इस पर मेरा कोई जोर नहीं ,

वक्त और हालात ने मुझे यहाँ धकेला है | 

जाना है तो रोकूँगा नहीं मैं तुझे ,

मगर आज भी है मुझे मोहब्बत तुझसे | 

वक्त के साथ शायद तुझे भी भूल जाऊँगा ,

बदले जो हालात, तो शायद फिर बदल जाऊँगा | 

पर पहले जैसे भी हूँ मैं ,

मगर हाँ, बदल गया हूँ मैं | 


                                 - प्रेरणा राठी 




उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...