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Monday, May 13, 2024

मौत का डर

जिंदगी तो जिंदगी, अब तो मौत से भी डर लगता है,
छोड़ जाओगे साथ हमारा, कहाँ वक्त लगता हैं | 

ना जाने कब हमारी साँसे हमें धोखा दे जाएँ,
ना जाने कब इस जहान से हमारा वास्ता हि छूट जाये | 

हमें तुम पर ईमान इतना भी तो नहीं,
शमशान जाने को चार कंधे मिलेंगे भी या नहीं | 

ना जाने हमारा आखरी सफर कैसा होगा,
अग्नि में हो जाँयगे फ़ना, 
या इतना भी हक हमारा ना होगा | 

कबर तो बनाना भी मत हमारी,
तन्हाई में बीत जाएगी उम्र सारी | 

डर शायद मौत का नहीं, 
तुम्हारी बेवफाई का हैं, 
गम दुनियाँ छोड़ जाने का नहीं,
उस तनहाई का हैं | 

हो सके तो एक एहसान हम पर कर देना,
जला देना इस शरीर को, इस रूह को रिहा कर देना | 

फिर शायद उस रब से दुआ कर पाऊ,
इस जहान में कदर हो मोहब्बत की, ये अर्जी कर पाऊ | 

                                     - प्रेरणा राठी 

Saturday, April 10, 2021

उलझन - 2

 पल -पल बिखर रहा है दिल,

रूह भी तड़प रही है तिल -तिल | 

लगता है अंदर कुछ बचा ही नहीं,

पर ये जिस्म बेदर्द पिघलता ही नहीं| 

सांस हम ले नहीं पाते,

और जिंदगी हमे छोड़ती नहीं| 

दुनिया से हम जुड़ नहीं पाते,

और रिश्तो की डोरी छूटती नहीं| 


                      - प्रेरणा राठी         

Monday, February 15, 2021

काँटा

 सुनहरे रंग में जब डूबी हो जिंदगी,

  तो हर शख्स अपना सा लगता है | 

  छा जाए जब काले बादल उस पर,

  तो हर अपना पराया सा लगता है | 

  शायद भूल जाते है लोग अक्सर,

  गुलाब के फूल पर काँटा भी लगता है | 


                       - प्रेरणा राठी 

उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...