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Wednesday, May 29, 2024

या नहीं

हम ढूँढ़ते तो है तुम्हें इस ज़माने में,

पता नहीं मिलोगे भी या नहीं ?

कोई ख्वाब हो या हो हकीकत तुम,

पता नहीं कभी जान पाएँगे या नहीं ?

तुम्हारे ख्याल साथ तो रहते है हमारे,

पता नहीं तुम्हारा हाथ कभी थाम पाएँगे या नहीं ?

हम तो दिल अपना यु ही दे बैठे तुम्हे,

पता नहीं तुम्हे खबर भी है या नहीं ?

छूकर निकल जाते हो बदन को किसी हवा के झोके की तरह,

पता नहीं कभी हमारे बाल सवारोगे या नहीं ?

रहते हो मेरी साँसों में तुम एक एहसास की तरह,

पता नहीं तुम्हें मेरी याद आती भी है या नहीं ?

बाँहो में तुम्हारी हमारे आँसू भी हमे धोखा दे जाते है,

पता नहीं तुम्हारी आँखों से सागर छलकता है या नहीं ?

तुमसे मिलने का ख्याल ही हमारे दिल में हज़ारों रंग भर देता है,

पता नहीं तुम हमसे मिलना चाहोगे या नहीं ?

तुम तो मेरा एक ख्वाब हो, ख्याल हो, एक एहसास हो,

पता नहीं उस खुदा ने तुम्हें बनाया भी है या नहीं ?


                                 - प्रेरणा राठी 





Sunday, January 22, 2023

अच्छा चलता हूँ !

 माना कि तेरे साथ चल नहीं पाऊँगा , 

माना कि तेरे साथ हँस नहीं पाऊँगा | 

तेरे आँसू, तेरे गम बाँट नहीं पाऊँगा ,

पर तेरा हि हिस्सा बनकर, तुझमे हि बस्ता जाऊँगा | 

जाना तो होगा मुझे इस जहान को छोड़ कर ,

खुदा के घर से आया है बुलावा शायद कुछ सोचकर | 

तेरे ख्वाबो, हमारे सपनो, अपने वादो को तोड़ कर ,

पर रहूँगा तेरे दिल में हमेशा एक हसींन वक्त बनकर | 

इन खूबसूरत आँखों का दरिया हम पर मत बहाना ,

ये बेशुमार मोहब्बत की दौलत हम पर ना लुटाना ,

थाम लेना किसी का हाथ तु ,

और उसमे हि अपना जहान बसा लेना | 

तेरे होंठो कि मुस्कुराहट देख, मैं खिल जाऊँगा ,

तेरी आँखों में खुशियों कि चमक देख, मैं तृप्त हो जाऊँगा | 

तू जिएगी, तो मैं भी जी जाऊँगा ,

मैं तुझ में हि हूँ, तुझमे हि बसता जाऊँगा | 

याद कभी आए मेरी तो चले आना हमारे मकबरे पर ,

मैं तो तेरे गले कि तावीज बन कर, तुझे सलामत करता जाऊँगा | 

तेरी साँसे मेरी रूह की धड़कनें है ,

जिस दिन तू ये जहान छोड़ कर जाएगी ,

                                                        मैं तुझे आसमान में हि मिल जाऊँगा | 


                                                                                               - प्रेरणा राठी 



उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...