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Wednesday, May 29, 2024

या नहीं

हम ढूँढ़ते तो है तुम्हें इस ज़माने में,

पता नहीं मिलोगे भी या नहीं ?

कोई ख्वाब हो या हो हकीकत तुम,

पता नहीं कभी जान पाएँगे या नहीं ?

तुम्हारे ख्याल साथ तो रहते है हमारे,

पता नहीं तुम्हारा हाथ कभी थाम पाएँगे या नहीं ?

हम तो दिल अपना यु ही दे बैठे तुम्हे,

पता नहीं तुम्हे खबर भी है या नहीं ?

छूकर निकल जाते हो बदन को किसी हवा के झोके की तरह,

पता नहीं कभी हमारे बाल सवारोगे या नहीं ?

रहते हो मेरी साँसों में तुम एक एहसास की तरह,

पता नहीं तुम्हें मेरी याद आती भी है या नहीं ?

बाँहो में तुम्हारी हमारे आँसू भी हमे धोखा दे जाते है,

पता नहीं तुम्हारी आँखों से सागर छलकता है या नहीं ?

तुमसे मिलने का ख्याल ही हमारे दिल में हज़ारों रंग भर देता है,

पता नहीं तुम हमसे मिलना चाहोगे या नहीं ?

तुम तो मेरा एक ख्वाब हो, ख्याल हो, एक एहसास हो,

पता नहीं उस खुदा ने तुम्हें बनाया भी है या नहीं ?


                                 - प्रेरणा राठी 





Wednesday, April 26, 2023

ये दिल

 हज़ारो ख्याल बुनता है ये दिल,

लहरों के तूफ़ान में बह भी जाता है ये दिल | 

काश तुम समझ पाते इसकी बेचैनी, इसकी तड़प को,

तुमसे ना जाने कितने सवाल करना चाहता है ये दिल | 


ख्वाहिशे तो बहोत करता है ये दिल,

चाहते भी इसकी है कामिल,

पर ज़माने से हार जाता है ये दिल,

हार का जशन भी अकेले हि मनाता है ये दिल | 


मैखाने कि शराब सा है ये दिल,

बटता सब में है, धडकता किसी-किसी में है ये दिल | 

मोहबत के सरूर में पागल हो जाता है ये दिल, 

नशा जो उतरे तो सूखा दरिया हो जाता है ये दिल | 


समंदर के पानी से भी खारा,

गुड से भी मीठा,

जहर से भी नशीला,

नशा इश्क़ का,

सब सह लेता है ये दिल,

पर मेहबूब की बेवफाई से बिखर जाता है ये दिल | 


ज़माने भर के ताने भी सुनता है ये दिल,

खुद को समझाने कि लाख कोशिशे भी करता है ये दिल,

मगर समझ ना पाया ज़माना इस दिल को,

ये समझ कर भी बहोत रोता है ये दिल | 


चाँद सितारों कि बातें तो करता है ये दिल,

आसमानों कि ऊँचाइयों में भी रहता है ये दिल,

पर हकीकत से भी वाक़िफ है ये दिल,

वो क्या है ना,

अब इतना मासूम नहीं रहा ये दिल | 


                                           - प्रेरणा राठी 

उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...