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Saturday, April 10, 2021

उलझन - 2

 पल -पल बिखर रहा है दिल,

रूह भी तड़प रही है तिल -तिल | 

लगता है अंदर कुछ बचा ही नहीं,

पर ये जिस्म बेदर्द पिघलता ही नहीं| 

सांस हम ले नहीं पाते,

और जिंदगी हमे छोड़ती नहीं| 

दुनिया से हम जुड़ नहीं पाते,

और रिश्तो की डोरी छूटती नहीं| 


                      - प्रेरणा राठी         

Sunday, March 7, 2021

बाकी है|

दिल तो टूट ही चुका है, बस साँसो का बिखरना बाकी है| 

रूह तो जुदा हो ही चुकी है, बस इस जिस्म का फ़ना होना बाकी है| 

खुशियाँ तो बहुत बाँट ली हमने, अब बस गुनाह कमाना बाकी है| 

उस खुदा को बहुत मान लिया, अब बेख़ुदाई करना बाकी है| 

वफा तो कर ली हमने, अब बेवफाई करना बाकी है| 

बहा लिए आँखों से आँसू भी हमने, अंगारों का बरसना बाकी है| 

मोहब्बत तो कर ही लि हमने, अब नफरत का होना बाकी है| 


                                     - प्रेरणा राठी 

उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...