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Monday, May 13, 2024

मौत का डर

जिंदगी तो जिंदगी, अब तो मौत से भी डर लगता है,
छोड़ जाओगे साथ हमारा, कहाँ वक्त लगता हैं | 

ना जाने कब हमारी साँसे हमें धोखा दे जाएँ,
ना जाने कब इस जहान से हमारा वास्ता हि छूट जाये | 

हमें तुम पर ईमान इतना भी तो नहीं,
शमशान जाने को चार कंधे मिलेंगे भी या नहीं | 

ना जाने हमारा आखरी सफर कैसा होगा,
अग्नि में हो जाँयगे फ़ना, 
या इतना भी हक हमारा ना होगा | 

कबर तो बनाना भी मत हमारी,
तन्हाई में बीत जाएगी उम्र सारी | 

डर शायद मौत का नहीं, 
तुम्हारी बेवफाई का हैं, 
गम दुनियाँ छोड़ जाने का नहीं,
उस तनहाई का हैं | 

हो सके तो एक एहसान हम पर कर देना,
जला देना इस शरीर को, इस रूह को रिहा कर देना | 

फिर शायद उस रब से दुआ कर पाऊ,
इस जहान में कदर हो मोहब्बत की, ये अर्जी कर पाऊ | 

                                     - प्रेरणा राठी 

Sunday, January 22, 2023

अच्छा चलता हूँ !

 माना कि तेरे साथ चल नहीं पाऊँगा , 

माना कि तेरे साथ हँस नहीं पाऊँगा | 

तेरे आँसू, तेरे गम बाँट नहीं पाऊँगा ,

पर तेरा हि हिस्सा बनकर, तुझमे हि बस्ता जाऊँगा | 

जाना तो होगा मुझे इस जहान को छोड़ कर ,

खुदा के घर से आया है बुलावा शायद कुछ सोचकर | 

तेरे ख्वाबो, हमारे सपनो, अपने वादो को तोड़ कर ,

पर रहूँगा तेरे दिल में हमेशा एक हसींन वक्त बनकर | 

इन खूबसूरत आँखों का दरिया हम पर मत बहाना ,

ये बेशुमार मोहब्बत की दौलत हम पर ना लुटाना ,

थाम लेना किसी का हाथ तु ,

और उसमे हि अपना जहान बसा लेना | 

तेरे होंठो कि मुस्कुराहट देख, मैं खिल जाऊँगा ,

तेरी आँखों में खुशियों कि चमक देख, मैं तृप्त हो जाऊँगा | 

तू जिएगी, तो मैं भी जी जाऊँगा ,

मैं तुझ में हि हूँ, तुझमे हि बसता जाऊँगा | 

याद कभी आए मेरी तो चले आना हमारे मकबरे पर ,

मैं तो तेरे गले कि तावीज बन कर, तुझे सलामत करता जाऊँगा | 

तेरी साँसे मेरी रूह की धड़कनें है ,

जिस दिन तू ये जहान छोड़ कर जाएगी ,

                                                        मैं तुझे आसमान में हि मिल जाऊँगा | 


                                                                                               - प्रेरणा राठी 



Saturday, April 10, 2021

उलझन - 2

 पल -पल बिखर रहा है दिल,

रूह भी तड़प रही है तिल -तिल | 

लगता है अंदर कुछ बचा ही नहीं,

पर ये जिस्म बेदर्द पिघलता ही नहीं| 

सांस हम ले नहीं पाते,

और जिंदगी हमे छोड़ती नहीं| 

दुनिया से हम जुड़ नहीं पाते,

और रिश्तो की डोरी छूटती नहीं| 


                      - प्रेरणा राठी         

Sunday, March 7, 2021

बाकी है|

दिल तो टूट ही चुका है, बस साँसो का बिखरना बाकी है| 

रूह तो जुदा हो ही चुकी है, बस इस जिस्म का फ़ना होना बाकी है| 

खुशियाँ तो बहुत बाँट ली हमने, अब बस गुनाह कमाना बाकी है| 

उस खुदा को बहुत मान लिया, अब बेख़ुदाई करना बाकी है| 

वफा तो कर ली हमने, अब बेवफाई करना बाकी है| 

बहा लिए आँखों से आँसू भी हमने, अंगारों का बरसना बाकी है| 

मोहब्बत तो कर ही लि हमने, अब नफरत का होना बाकी है| 


                                     - प्रेरणा राठी 

उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...