Monday, April 18, 2022

STAY

Don't you think, it's too early to leave, 
Stay a little more, and let me make you believe. 
We can fall in love once again, 
Give me an another chance, make me relieve. 
I am going crazy with the thought of you going away, 
Please don't do this to me, I'll try my best every way. 
Just once again, let me make you smile, 
If I fail, I won't take any more of your time. 
I know, I broke your trust and your heart, 
But I am asking for one last chance. 
I promise, I'll never break my promises ever again, 
Let me love you, love me back, and let's not part ever again. 

                               - Prerana Rathi

Sunday, March 27, 2022

LIFE

Someone will come, someone will leave, 

Someone will stay, that's how it's supposed to be. 

Sometimes you cry, sometimes you smile, 

Sometimes you don't know, you have to walk miles. 

Sometimes it's up, sometimes it's down, 

Sometimes it's rocky, we better not fall down. 

Sometimes we fall, sometimes we rise, 

Sometimes we just stay there, trying to process what's mine. 

Sometimes we are alone, sometimes there are many, 

Sometimes we feel closer with the strangers passing by. 

Sometimes bitter, sometimes sweet, 

Sometimes you get to know a new flavor of life's treat. 

Sometimes happy, sometimes sad, 

Sometimes you don't know and break down in the process. 

But it's life, this is how it's supposed to be, 

If not so, then let me know freely.


                                     - Prerana Rathi

Monday, March 21, 2022

वादा

 उस चाँद का दीदार करते है,

हाँ, हम तुमसे आज भी प्यार करते हैं| 

पर ना कहना चलने को साथ तू,

अब हम साथ किसी और के चलते हैं| 

जो तुने किया, हम वो कर नहीं पाएँगे,

दिल उसका तोड़ नहीं पाएँगे| 

प्यार न सही, मगर साथ उसका देकर,

हम अपना वादा जरूर निभाएँगे| 


                         - प्रेरणा राठी 

Friday, June 18, 2021

कैसे हो तुम

 बात करने का मन तो करता है तुमसे,

लेकिन हिम्मत नहीं होती | 

तुम पूछोगे कि, "कैसे हो तुम"?

हर दर्द की सुबह नहीं होती | 

तुम्हारे इस सवाल से,

हमारे अंदर तूफ़ान आ जाता है,

क्या कहे, क्या ना कहे,

दिल कुछ समझ नहीं पाता है | 

तुम्हे अपना हाल समझाए कैसे,

एक बार ये ख्याल आता है | 

"हम ठीक है", कह कर 

हमारे होंठो से मुस्कुराहट का,

साया भी चला जाता है | 

ये सवाल हम तुमसे, 

पूछने से भी डरते है,

ना जाने क्या - क्या कहोगे तुम,

इस ख्याल से ही सहम जाते है | 

पर फिर तुम्हारे चेहरे से भी,

खुशी का नाम चला जाता है,

"हम ठीक है", कह कर,

तुम्हारा धयान कही और चला जाता है | 

इस सवाल को छोड़कर,

फिर हम आगे बढ़ जाते है,

तूफ़ान को रहने के लिए,

घर हम ही दे जाते है | 


                          - प्रेरणा राठी  

Friday, May 7, 2021

क्या रख ?

 

ऊँची है उड़ान तेरी, आपने हौसलो को बुलंद रख | 

होगी एक दिन ये दुनियाँ कदमो में तेरे, खुद पर यकी रख | 

राहे होंगी नहीं आसान, पर अपने कदमो को मजबूत रख | 

मिलेगी जन्नते भी तुझे, उस खुदा पर एतबार रख | 

जमाना कहे चाहे कुछ भी तुझसे, बस अपनों पर भरोसा रख | 

जो दिल मासूम है तेरा, उस दिल में सिर्फ मोहब्बत रख | 

किसने कहा आसमान को अपनी सीमा बना, अपनी सोच को सीमाहीन रख | 

छूना है अगर उस चाँद को, तो पंख अपने फैला कर रख | 

पूरी कायनात भी होगी तेरी, दिल में अपने तव्वजो रख | 

याद रखेगा ये ज़माना भी तुझे, अपने नाम का परचम लहराने को तैयार रख | 


                                                  - प्रेरणा राठी 

Wednesday, April 21, 2021

द्रौपदी

 यज्ञ से जन्मी, थी यज्ञसैनी मैं ,

पिता को चाहत थी पुत्र की ,

उस ईनाम के साथ खैरात में थी आई मैं | 

द्रुपद के घर थी जन्मी, द्रौपदी कहलाई मैं ,

पांडवो से विवाह किया, वेहशिया भी कहाई मैं | 

मित्रता मिली कृष्ण की, 

जिसने अर्जुन के दिखाए ख्वाब मुझे, 

कर्ण को भी ठुकरा दिया कहने पर जिसके मैंने | 

कुंती ने जबान दे दि , कहा बाँट लो मुझे ,

धर्म कि रक्षा के लिए चढ़ा दिया बलि मुझे | 

मेरा मुझ पर ही हक ना रहा, पति ने हक जताया था ,

जुए में दाँव पर लगा कर, मेरा गौरव मिट्टी में मिलाया था | 

बालों से घसिटी गई , हाँथ भी उठाया था ,

दुष्ट दुशासन से फिर वही हाँथ मेरे वस्त्र की ओर बढ़ाया था | 

अपना आँचल फाड़ कर कृष्ण के जखम पर लगाया था ,

उसी आँचल से फिर कृष्णा ने मेरा चीर बढ़ाया था | 

चींखी, चिलाई, इंसाफ के लिए गुहार लगाई ,

मगर पुरुषों की भरी सभा ने मुझ पर ही थी ऊँगली उठाई | 

पाँच पांडवो से सम्बंध रखने वाली स्त्री कहलाई ,

द्रौपदी, पांचाली, साम्रगी होकर भी मैं सिर्फ वेहशिया ही कहाई | 

पवित्र होकर भी अपवित्र समझी गई मैं ,

लालच पुरुषों का था, मगर तवाईफ़ समझी गई मैं 

क्रोध का ज्वाला भड़क उठा, था टुटा सबर मेरा ,

गांधारी ने जो न रोका होता, भरी सभा को श्राप मेरा के देता स्वाहा | 

खैरात में आऊ ,

द्रौपदी कहलाऊ ,

पांचाली बन जाऊ ,

पांडवों से विवाह रचाऊ ,

वेहशिया कहाऊ ,

दासी बन जाऊ ,

बेइज़्जत हो जाऊ ,

इज़्जत गवाऊ ,

चीर हरण सह जाऊ ,

सबर का घूँट पी जाऊ ,

और धर्म भी मैं ही बचाऊ | 

और आज भी कुछ लोग कहते है, महाभारत का युद्ध द्रौपदी ने कराया था ,

मैं तो सिर्फ जरिया थी, धर्म का डंका तो कृष्णा ने बजाया था | 

दुर्योधन का लालच था, युधिष्ठिर धर्मराज कहलाया था ,

कोरवो और पांडवों के बीच युद्ध का मोहरा मुझे कृष्णा ने बनाया था | 

मित्र ने ही मित्र का जीवन दाँव पर लगा दिया ,

कृष्णा ने मेरा बलिदान देकर धर्म स्थापित करा लिया | 

गीता का ज्ञान बाँट दिया युद्ध के मैदान में ,

धर्म भी सीखा दिया कौरवो के विध्वंस से | 

पर आज मेरा अस्तित्व क्या है ,

जो है वो कृष्णा है ,

गीता का ज्ञान अजर है ,

पर मेरा योगदान भी अमर है ,

आखिर द्रौपदी हूँ मैं ,

मुझ में ही महाभारत हैं | 


                                    - प्रेरणा राठी 





Saturday, April 10, 2021

उलझन - 2

 पल -पल बिखर रहा है दिल,

रूह भी तड़प रही है तिल -तिल | 

लगता है अंदर कुछ बचा ही नहीं,

पर ये जिस्म बेदर्द पिघलता ही नहीं| 

सांस हम ले नहीं पाते,

और जिंदगी हमे छोड़ती नहीं| 

दुनिया से हम जुड़ नहीं पाते,

और रिश्तो की डोरी छूटती नहीं| 


                      - प्रेरणा राठी         

Wednesday, March 10, 2021

बदल गया हूँ मैं

हाँ, बदल गया हूँ मैं ,

खुद के ही नए हिस्से से मिला हूँ मैं | 

नहीं जानता था कल तक मैं इसे ,

पर वक्त और हालात ने मिला दिया मुझे इससे | 

मानू या ना मानू, ये मेरा ही हिस्सा हैं ,

मेरी कहानी का ये भी एक किस्सा हैं | 

खुद को ही जानने कि कोशिश कर रहा हूँ ,

नए आज को समझने कि कोशिश कर रहा हूँ | 

प्यार है अगर मुझसे, तो तु भी इसको जान ले ,

मोहब्बत है अगर मुझसे, तो तु भी इसको मान ले | 

तुने मुझे बदलते हुए देखा हैं ,

और शायद इसी का तुझे गिला है | 

पर इस पर मेरा कोई जोर नहीं ,

वक्त और हालात ने मुझे यहाँ धकेला है | 

जाना है तो रोकूँगा नहीं मैं तुझे ,

मगर आज भी है मुझे मोहब्बत तुझसे | 

वक्त के साथ शायद तुझे भी भूल जाऊँगा ,

बदले जो हालात, तो शायद फिर बदल जाऊँगा | 

पर पहले जैसे भी हूँ मैं ,

मगर हाँ, बदल गया हूँ मैं | 


                                 - प्रेरणा राठी 




Sunday, March 7, 2021

बाकी है|

दिल तो टूट ही चुका है, बस साँसो का बिखरना बाकी है| 

रूह तो जुदा हो ही चुकी है, बस इस जिस्म का फ़ना होना बाकी है| 

खुशियाँ तो बहुत बाँट ली हमने, अब बस गुनाह कमाना बाकी है| 

उस खुदा को बहुत मान लिया, अब बेख़ुदाई करना बाकी है| 

वफा तो कर ली हमने, अब बेवफाई करना बाकी है| 

बहा लिए आँखों से आँसू भी हमने, अंगारों का बरसना बाकी है| 

मोहब्बत तो कर ही लि हमने, अब नफरत का होना बाकी है| 


                                     - प्रेरणा राठी 

Monday, March 1, 2021

दर्द

इस दर्द से गिला क्यों करता है,

ये दर्द ही तो तेरा सच्चा साथी है| 

एक दिन छुड़ा लेगा हाथ ये जमाना तुझसे,

मगर दर्द को तो है मोहब्बत तुझसे| 

ज़िंदगी की राहों में तेरे साथ चलता जाएगा,

बिना रुके, बिना थके, सहारा तुझे देता जाएगा| 

राहें जानी-पहचानी हो, या अनजान हो,

दर्द की ना कोई सुबहः हो, ना ही कोई रात हो| 

पूछते है लोग, कौन किसके प्यार में जान देता है?

दर्द तो वो आशिक़ है जनाब, जो कबर में भी साथ सोता है| 


                               - प्रेरणा राठी 


उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...