Tuesday, December 8, 2020

उलझन

 तू आया, मगर आ कर भी ना आया,

 तू  गया, मगर जा कर भी ना गया| 

 अब दिल हमारा, बड़ी उलझन में है बेचारा,

 कि तू गया क्यों नहीं, जब तू आया ही नहीं था| 


                          - प्रेरणा राठी  

Friday, December 4, 2020

पहली मुलाकात

आज तुमसे हमारी पहली मुलाकात थी,

ना जाने उसमे क्या बात थी| 

ना कोई रिश्ता था तुमसे हमारा,

और ना ही कोई पहचान थी| 

फिर भी इस दिल ने कहा,

कि एक दफा तुमसे बात करू,

बस एक दफा तुमको जान लू | 

पर हमको क्या पता था,

कि ये दिल तुमसे इस कदर जुड़ जाएगा,

खुलेगा बातों का ख़जाना और,

आँखों से दरीया बहता जाएगा| 

जन्म -जन्म का तो पता नहीं,

मगर इस जन्म में हमारा साथ चलता जाएगा| 

भले हि ना रहना तुम साथ हमारे,

मगर तुम्हारा अक्स मेरे साथ चलता जाएगा| 


                        - प्रेरणा राठी  

Tuesday, November 3, 2020

दिल के उसूल

किसी के आने से पहले, उसके जाने का डर रहता है, 
इसलिए हम किसी को अपने करीब आने ही नहीं देते। 
किसी के प्यार करने से पहले, उसके बेवफ़ाई करने का गम सताता हैं, 
इसलिए हम किसी से मोहब्बत ही नहीं करते। 
उस खुदा से दुआ माँगने से पहले, उसके ना-क़बूल होने का दुःख होता है, 
इसलिए हम उस खुदा से फ़रियाद ही नहीं करते। 
उसके घर की चौखट पार करने से पहले, खाली हाथ लौटने का खालीपन होता है, 
इसलिए हम उसकी दहलीज़ कभी नहीं लाघंते।
इस दुनिया से रिश्ता जोड़ने से पहले, उसके बिखर जाने का एहसास होता है, 
इसलिए हम किसी को अपने दिल में पनाह ही नहीं देते। 
किसी के तारीफ़ करने से पहले, उसके मन में बसी नफ़रत का अंदाजा हो जाता है, 
इसलिए हम किसी कि तारीफो के मोहताज ही नहीं रहते। 
किसी के बात करने से पहले, उसकी मजबूरी का पता चल जाता है, 
इसलिए हम उनसे फिजूल की बातें कर, उनका वक़्त जाया नहीं करते। 
किसी कि यादों में डूबने से पहले, किनारा न मिलने का डर होता है, 
इसलिए हम किसी को अपनी यादों में ही नहीं बसाते। 
किसी के सपने सजाने से पहले, उनके टूटने का खौफ होता है, 
इसलिए हम किसी के सपने ही नहीं बुनते। 
किसी के साथ चलने से पहले, उसके बीच मझधार में छोड़ जाने का शक होता है, 
इसलिए हम किसी के साथ सफर पर ही नहीं निकलते। 

पर ये दिल तो दिल है जनाब, 
ये कहाँ किसी कि सुनता हैं। 
खा कर धोखे जमाने के, 
फिर कुछ नए उसूल बना लेता है। 
 
                                - प्रेरणा राठी

Wednesday, October 14, 2020

मौत का धंधा

जब मौत को गले लगाया, 
तब दुनिया का एक और सच सामने आया। 
सुना था, मरने के बाद सारी परेशानियाँ खत्म हो जाती हैं, 
सुकून होता है और रुह को जन्नत मिल जाती हैं। 
मैं भी चढ़ा था उस खुदा के घर की सीढ़ियाँ, 
पर न आया वो बाहर, न खोली उसने खिडकियाँ। 
फिर कही से एक आवाज़ आई-
तु तो मर कर भी नहीं मर पाया, 
इस दुनिया ने तुझ पर मुकदमा हैं चलाया। 
जा पहले उन से अर्जी लेकर आ, 
इस दुनिया से मुक्ती लेकर आ। 

तुझे अपने घर में पनाह नहीं देनी तो मत दे, नाटक क्यों करता है, 
जिन्होंने मेरी मौत का षड़यंत्र रचा, उन्हीं से भीख माँगने को कहता है। 
क्या फर्क पडता हैं, मैने खुदखुशी कि या उन्होनें मुझे मार डाला, 
दोनों ही तस्वीरो में, कीचड़ मुझ पर ही तो उछाला। 
मेरे शरीर को कभी नहीं अपनाया,
और आज मेरी रूह पर भी है दाग लगाया। 
और तु कहता है कि इन फर्जी लोगों कि अर्जी लेकर आऊ, 
मुकदमा जो चलाया इन्होनें मुझ पर, उसमें बेकसूर साबित होकर आऊ। 
ओ मेरे खुदा, तु कितना भोला है, जाकर नीचे तो देख, 
नरक से भी बत्तर सर्वग, इंसान ने खोला हैं। 
पर तुझसे क्या शिकायत करू, तु तो अपना काम कर रहा है, 
जन्नत मिले उसी को, जो बेगुनाह है। 
बर्बाद तो मुझे तेरी बनाई दुनिया ने कर दिया, 
छीन ली मेरे पैरों से जमींन, अब आसमान भी ले लिया। 
पर अगर तु चहाता हैं, तो थोड़ा और भटक लूगाँ, थोड़ा और तड़प लूगाँ, 
जब तक बेगुनाह साबित नहीं हो जाता, बर्बादी का दर्द थोड़ा और सह लूगाँ। 
पर तुझसे एक वादा मैं लेना चहाता हुँ, 
होगा इस मुकदमे का अंत, बस इतना यकीन दिला दे तू। 
क्योंकि मुझे इस दुनिया पर पूरा भरोसा है, ये मुझे कभी रिहा नहीं होने देगें, 
मेरी मौत को धंधा बनाकर हर रोज बाजार में बेंचेगे। 

                          - प्रेरणा राठी

Thursday, October 8, 2020

बेटियाँ

तुमने बचपन छीन लिया मेरा, 
बन गई खिलौना मैं तेरा। 
पडा मुझ पे तेरा साया जब से, 
भूल गई मैं मुस्कुराना तब से। 
मेरे सपनो का महल तोड़ दिया तुमने, 
मेरी रूह तक को झनझोड दिया तुमने। 
मेरी पायल को तुमने बेडियो में बदल दिया, 
मेरी महंदी को तुमने लाल रंग से रंग दिया।
 मेरे आसू देख मेरे माँ-बाप भी रोते है, 
और शायद इसीलिए,
लोग बेटी को पैदा करने से पहले हजार बार सोचते हैं। 
ऐ इंसान, खुदा भी जब तुझे देखता होगा, 
बन गया तु हैवान कैसे, वो भी सोचता होगा। 
लेकिन एक वक्त ऐसा भी आएँगा, 
जब तु अपनी ही परछाई से मुँह छिपाएँगा।
जब आएँगी वो तेरे घर,
तब शायद तुझे समझ आएँगा। 
जब पुकारेगी वो तुझे बाबा कहकर, 
तब तु अपनी गलती पर पछता भी न पाएँगा। 
लेकिन अब तो ये भी पता नहीं, 
बाबा शब्द का अर्थ, क्या तु समझ भी पाएँगा। 
तु इंसान हैं, न जाने कब हैवान बन जाएँगा, 
और उसकी रूह तक को भरे बाजार में नीलाम कर आएँगा। 


                           - प्रेरणा राठी



Wednesday, September 30, 2020

खामोश दिल

इस खामोश दिल की बातें तुम समझ न पाए, 
और कहने कि हिम्मत हम जुटा न पाए। 
खामोश रहे हम तुम्हारा प्यार पाने को, 
फिर भी तरसते रहे तुम्हारा साथ पाने को। 
हवाओ कि तरह हमने रूख ही अपना बदल दिया, 
अपनी ओर बहना तो छोड़ ही दिया। 
हमने खामोश रह कर तुम्हारा सम्मान किया, 
लेकिन तुमने उसे हमारी कमजोरी समझ कर टाल दिया। 
जो भी किया तुम्हारे लिए किया, हर लम्हा तुम्हारे लिए जिया। 
लेकिन आज तुमने हमें खुदगरज कह कर हमारा बहिष्कार किया। 
हम तब भी खामोश थे, हम आज भी खामोश हैं, 
लेकिन इस खामोशी कि वजह आज कुछ और है। 
पहले तुम्हारा प्यार पाना चाहते थे, लेकिन आज हम थक चुके हैं, 
जिंदगी के इस सफ़र में हम तुमसे हार चुके हैं। 
लेकिन तुमसे कोई गिला नहीं है अब हमें, 
मोहब्बत सी हो गई है इस खामोशी से अब हमें। 

                                - प्रेरणा राठी

Thursday, September 10, 2020

जिंदगी की कहानी

लिखने तो बैठे थे अपनी जिंदगी कि कहानी, 
धीरे -धीरे याद आ गई कई बातें पुरानी। 
लिखते -लिखते जब आज पर आ गएँ तो, 
कुछ पन्ने पलटे और देखा, 
फिर कुछ पन्ने पलटे और देखा, 
फिर कुछ और पन्ने पलटे, तो एहसास हुआ, 
कि हमने अपने बारे में तो कुछ लिखा ही नहीं। 

                             - प्रेरणा राठी

Thursday, September 3, 2020

ममता

छोटी -छोटी आँखो में प्यार बेशुमार दिखता है, 
नन्हें - नन्हें हाथों से जब तु छूएँ, तो मेरा रोम - रोम जाग उठता है। 
तुम्हारी एक मुस्कुराहट से दिन की सारी थकान उतर जाती हैं, 
छोटे - छोटे कदम जब बढ़ते हैं मेरी ओर, तो एक नई सुबह हो जाती हैं। 
आवाज़ देकर जब बुलाते हो मुझे, तो दिल धडकने लगता हैं, 
आसुँ जब गिरे तेरी आँखों से, तो दिल मेरा रोने लगता हैं। 
मेरी एक पुकार पर तुम दौड़े चले आते हो, 
बात जो न करू तुमसे, तो गुस्से से लाल हो जाते हो। 
निवाला जो तुझे खिलाऊ तो पेट मेरा भर जाता है, 
न जाने कब तेरे साथ ये पूरा दिन गुजर जाता है। 
सोता है जब तु मेरे सीने से लग कर, तो मुझे जन्नत मिल जाती हैं, 
खोले जब सुबह आँखें तु, तो मेरी दुनिया खिल जाती हैं। 
महकता है जीवन मेरा खुशबू से तेरी, 
रब करे ये मासूमियत बनी रहे ताउम्र तेरी। 

                            - प्रेरणा राठी

Sunday, August 30, 2020

ज़िन्दगी

वजूद बुलबुले सा
ज़िन्दगी पहाड़ सी
मिली ऐसे, जैसे
कोई लताड़ सी।
कभी जो टूटी लगी कांच सी
कभी फुदकती
कभी चहकती
कभी रेंगती सांप सी।
कितने रंग
कितनी जंग
कभी भोगते
कभी भुगतते
कभी उखड़ती सांस सी।
नरमी से
सख़्ती से 
कभी रीझती
कभी सालती
कभी टीसती फांस सी
है जिंदगी भी प्यास सी।
                      
                  - आशीष गोरयान

Friday, August 28, 2020

महफ़िलें

लोगों की इस दुनिया में, महफ़िलें तो हर रोज जमती हैं, 
अकेले रह जाते हैं हम, दुनिया देख कर हंसती है। 
कल तक जो हमारे साथ थे, आज वो किसी और की महफ़िल का सितारा है, 
अब हमारा साथ, कहाँ किसी को गवारा है। 
इंसान के रंगों के आगे, प्रकृति के रंग भी फिके पड जाते हैं, 
यहाँ मौसम से पहले इंसान बदल जाते हैं। 
आज यहाँ, तो कल वहाँ, जमेगी लोगों की महफ़िल, 
पर साथ निभाएँ जो जिंदगी भर, कहाँ हैं ऐसा साहिल। 
हम तो इन महफ़िलों से अब दूर ही रहते हैं, 
क्योंकि इन महफ़िलों में अक्सर, बस दिल ही टूटते हैं। 
कभी किसी टूटे हुएँ दिल के साथ महफ़िल जमा कर देखो जनाब,
दुनिया का कोई भी रंग, न आएँगा फिर तुमको रास। 

                            - प्रेरणा राठी

उसके बटुए में, और मेरी किताबों में, आज भी तस्वीर किसी और की मिलती हैं, कहने को तो हम जीवन साथी है, पर इश्क़ में तक़दीरें सबकी कहाँ बनती हैं | ...